कबीरदास के दोहे – Kabir Das Quotes In Hindi – कबीर के प्रसिद्ध दोहे

कबीरदास के दोहे –  दोस्तों जैसा की आप सब जानते हो की कबीरदास जी हमारे भारत देश के प्रसिद्ध कवि है। जिन्होंने हिंदी की बहुत सारी कविताओं को कुछ पुस्तकों के रूप में भारत देश के सामने प्रकट किया है। आज की इस पोस्ट में हम कबीर के दोहे हिंदी में, कबीरदास के दोहे अर्थ सहित, कबीर दास जी के दोहे हिंदी में अर्थ, कबीर दास जी के प्रसिद्द दोहे, कबीर के दोहे साखी, संत कबीर के प्रसिद्द दोहे और उनके अर्थ, Kabir Das Ke Dohe In Hindi, Kabir Ke Dohe With Meaning in Hindi, Kabirdas ke Dohe In Hindi With Meaning, Kabir Dohe In Hindi पढ़ेंगे। जिनको आप फेसबुक/व्हाट्सप्प पर शेयर कर सकते हो, तो चलिए स्टार्ट करते है।

Also Read :-

संत कबीरदास की जीवनी

नामसंत कबीर दास
जन्मतिथि1455
जन्मस्थानकाशी (रामतारा)
रचनायेसाखी, सबद, रमैनी
मृत्यु1551

कबीरदास के दोहे अर्थ सहित

गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पाँय,
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय।
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,
जो मन देखा आपना, मुझ से बुरा न कोय।
 साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,
सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।
धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।
तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय,
कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।
यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान,
शीश दियो जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान।
ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये,
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।

Kabir Das Ke Dohe In Hindi

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।
दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय,
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय।
मलिन आवत देख के, कलियन कहे पुकार,
फूले फूले चुन लिए, कलि हमारी बार।
दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त,
अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत।
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब,
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब।
बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।
कबीर कूता राम का, मुटिया मेरा नाऊ,
गले राम की जेवड़ी, जित खींचे तित जाऊं।

Kabir Das Quotes In Hindi

जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होए,
यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोए।
जिन घर साधू न पुजिये, घर की सेवा नाही,
ते घर मरघट जानिए, भुत बसे तिन माही।
अवगुण कहू शराब का, आपा अहमक होय,
मानुष से पशुआ भय, दाम गाँठ से खोये।
बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।
पाछे दिन पाछे गए हरी से किया न हेत,
अब पछताए होत क्या, चिडिया चुग गई खेत।
नहाये धोये क्या हुआ, जो मन मैल न जाए,
मीन सदा जल में रहे, धोये बास न जाए।
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।
पतिबरता मैली भली गले कांच की पोत,
सब सखियाँ में यों दिपै ज्यों सूरज की जोत।

Kabir Ke Dohe With Meaning in Hindi

दोस्तों ऊपर आपने पढ़े कबीरदास जी के प्रचलित दोहे, अगर आप इंटरनेट पर कबीर के दोहे मीठी वाणी, कबीर के दोहे मित्रता पर, कबीर के दोहे धर्म पर, कबीर की उलटवासियाँ, कबीर के उलटे दोहे,  संत कबीर के सर्बश्रेष्ठ दोहे व उनके अर्थ आदि खोज रहे थे तो आप बिलकुल सही स्थान पर है। क्योकि आज की इस पोस्ट में हमने आपके लिए कबीर के दोहो का अटूट संग्रह तैयार किया हैं, जो आपको बेहद ही पसंद आएगा।

जल में कुम्भ कुम्भ  में जल है बाहर भीतर पानी,
फूटा कुम्भ जल जलहि समाना यह तथ कह्यौ गयानी।
एकही बार परखिये ना वा बारम्बार,
बालू तो हू किरकिरी जो छानै सौ बार।
काची काया मन अथिर थिर थिर  काम करंत,
ज्यूं ज्यूं नर  निधड़क फिरै त्यूं त्यूं काल हसन्त।
मन मरया ममता मुई, जहं गई सब छूटी,
जोगी था सो रमि गया, आसणि रही बिभूति।
हीरा परखै जौहरी शब्दहि परखै साध,
कबीर परखै साध को ताका मता अगाध।
ऊंचे कुल क्या जनमिया जे करनी ऊंच न होय,
सुबरन कलस सुरा भरा साधू निन्दै सोय।
कबीर हमारा कोई नहीं हम काहू के नाहिं,
पारै पहुंचे नाव ज्यौं मिलिके बिछुरी जाहिं।
जानि बूझि साँचहि तजै, करै झूठ सूं नेह,
ताकी संगति रामजी, सुपिनै ही जिनि देहु।

कबीर के प्रसिद्ध दोहे

देह धरे का दंड है सब काहू को होय,
ज्ञानी भुगते ज्ञान से अज्ञानी भुगते रोय।
कबीर संगति साध की , कड़े न निर्फल होई,
चन्दन होसी बावना , नीब न कहसी कोई।
ऊंचे कुल क्या जनमिया जे करनी ऊंच न होय,

सुबरन कलस सुरा भरा साधू निन्दै सोय।
रात गंवाई सोय कर दिवस गंवायो खाय,
हीरा जनम अमोल था कौड़ी बदले जाय।
मन मैला तन ऊजला बगुला कपटी अंग,
तासों तो कौआ भला तन मन एकही रंग।
हाड जले लकड़ी जले जले जलावन हार,
कौतिकहारा भी  जले कासों करूं पुकार।
कबीर सोई पीर है जो जाने पर पीर,
जो पर पीर न जानई  सो काफिर बेपीर।
प्रेम न बाडी उपजे प्रेम न हाट बिकाई,
राजा परजा जेहि रुचे सीस देहि ले जाई।

कबीर के लोकप्रिय दोहे हिंदी में

पढ़ी पढ़ी के पत्थर भया लिख लिख भया जू ईंट,
कहें कबीरा प्रेम की लगी न एको छींट।
जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि है मैं नाहीं,
प्रेम गली अति सांकरी जामें दो न समाहीं।
मन के हारे हार है मन के जीते जीत,
कहे कबीर हरि पाइए मन ही की परतीत।
जल में कुम्भ कुम्भ  में जल है बाहर भीतर पानी,
फूटा कुम्भ जल जलहि समाना यह तथ कह्यौ गयानी।
तरवर तास बिलम्बिए, बारह मांस फलंत,
सीतल छाया गहर फल, पंछी केलि करंत।
मन मरया ममता मुई, जहं गई सब छूटी,
जोगी था सो रमि गया, आसणि रही बिभूति।
जानि बूझि साँचहि तजै, करै झूठ सूं नेह,
ताकी संगति रामजी, सुपिनै ही जिनि देहु।
मूरख संग न कीजिए ,लोहा जल न तिराई,
कदली सीप भावनग मुख, एक बूँद तिहूँ भाई।

कबीरदास के दोहे – Kabir Das Quotes In Hindi – कबीर के प्रसिद्ध दोहे पढ़ने के लिए धन्यवाद्, अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगी तो इसको व्हाट्सप्प फेसबुक आदि पर शेयर जरूर कर दे। और साथ ही साथ नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बताये की आपको हमारे ये पोस्ट कैसी लगी।

One Comment on “कबीरदास के दोहे – Kabir Das Quotes In Hindi – कबीर के प्रसिद्ध दोहे”

Leave a Reply